क्षत्रिय धर्म को भूल, राजपूत हम बन गये, छोङे सारे क्षत्रिय सँस्कार अँहकार मे तन गये, क्षत्रिय धर्म मे पले हुए हम शिर कटनेपर भी लङते थे, दिख जाता अगर पापी ओर अन्याय कहिँ शेरो कि...
तूं जब से इस दूनिया में आया... तुने क्षत्रिय कुल जब पाया... कर उस क्षात्र धर्म को वंदन...... जिसे किस्मत से तुने पाया... में जब से समजन लागा. .. मेरा भाग्य पूराना जागा. ... कभी तलवारों से खेला.... ...
१- अपने पूर्वजों का सम्मान करें तथा अपने बच्चों को पूर्वजों की कथाओं/गुणों से परिचित कराएँ. २- अपने-अपने घरों में महाभारत,गीता,रामायण एवं महापुरुषों से सम्बंधित गाथाएं आदि ...
अपने हक पर मौन रहने वाला सदा ही रोया है !! राजवंशो की उदारता ने ही, आज अपने रजवाडों को खोया है !! हे क्षत्रिय तू तोड़ दे ये मौन, चाहे संविधान भी विरूद्ध हो !! कि अब क्षत्रिय हित के लिए ...
राजपूतों की ऐसी कहानी है , कि राजपूत ही राजपूत कि निशानी है l हम जब आये तो तुमको एहसास था , कि कोई एक शेर मेरे पास था ll हम गरम खून के उबाल हैं , प्यासी नदियों की चाल हैं , l हमारी गर्जना ...
पढियेँ ! जब जब धरती पे बढा है पापो का भार । क्षत्रियो ने उठाई है तलवार। रावण का जब बढ गया था अँहकार। तो राम ने लिया था क्षत्रिय कुल मेँ अवतार। जब बहूत मारा था लोगो को पापी कँस ने...