वड पोहो भो परमार वंश , आहव वीर अभंग !! नृप उज्जैणी नगर रा , राव सुन्धवा रंग !!१!! पर दुख भंजण पराक्रमी , दिपयो दनी देवंग !! कश्मीर दत किनी कवियां , राजा विक्रम रंग !!२!! धारा नगर दाता धणी , आंण...
आग धधकती है सीने मे, आँखों से अंगारे, हम भी वंशज है राणा के, कैसे रण हारे...? कैसे कर विश्राम रुके हम...? जब इतने कंटक हो, राजपूत विश्राम करे क्योँ, जब देश पर संकट हो. अपनी खड्ग उठा लेते ...