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परमार वंश के दोहे

वड पोहो भो परमार वंश , आहव वीर अभंग !! नृप उज्जैणी नगर रा , राव सुन्धवा रंग !!१!! पर दुख भंजण पराक्रमी , दिपयो दनी देवंग !! कश्मीर दत किनी कवियां , राजा विक्रम रंग !!२!! धारा नगर दाता धणी , आंण...
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आग धधकती है सीने मे,

आग धधकती है सीने मे, आँखों से अंगारे, हम भी वंशज है राणा के, कैसे रण हारे...? कैसे कर विश्राम रुके हम...? जब इतने कंटक हो, राजपूत विश्राम करे क्योँ, जब देश पर संकट हो. अपनी खड्ग उठा लेते ...

शायरी

ये तो राजपूतो की तलवारो का कारनामा है दोस्तों... वरना हिंदुस्तान तो कभी का मुगलस्तान हो चूका होता।

क्षत्रिय धर्म को भूल,राजपूत हम बन गये..........

क्षत्रिय धर्म को भूल,राजपूत हम बन गये ! छोङे सारे क्षत्रिय सँस्कार, अँहकार मे तन गये ! क्षत्रिय धर्म मे पले हुए हम शिर कटने पर भी लङते थे ! दिख जाता अगर पापी ओर अन्याय कहिँ शेरो क...

जूंझार जीवकरणजी

       ✍काव्य-रचना✍ किण भात लिखू म्है म्हनै बता, जीवकरण रे वीरता री गाथाl आ कलम केवती क्यु सिसके, निश्वास छोड़ती अब हाथा ll जीवकरण जूंझार री अमर कहानी, जद् लिखवा ने हुँ तैयार हु...

लग रहा है सिंहनी के कोख से पैदा हुआ हूँ...

माँ तुम्हारा लाडला रण में अभी घायल हुआ है... पर देख उसकी वीरता को, शत्रु भी कायल हुआ है... लग रहा है सिंहनी के कोख से पैदा हुआ हूँ... रक्त की होली रचा कर, मैं प्रलयंकारी दिख रहा हूँ ... म...

!!!!जरा याद क्षात्र धर्म को करलो!!!!

भूल क्षत्रिय धर्म को ,मात्र राजपूत हम बन गये, छोङे दिये सारे क्षत्रिय सँस्कार,और अँहकार मे तन गये । क्षत्रिय धर्म मे पलने वाले, शिर कटने पर भी लङते थे, होता अगर अन्याय और पाप क...