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रँग रै राजस्थान दूहा

माण काज मरणौ मँडै,जँग हद जुङै जवान
रजवट रीत रुखाळणा रँग रे राजस्थान!!1!!

कटै वीर धर कारणै प्रण सट्टै दै प्राण
ऐङा नर उपनै अठै रँग रै राजस्थान!!2!!

नर नैकी चूकै नही बौलण एकी बाण
दैखी इण दुनियाँण मेँ रँग रे राजस्थान!!3!!

मरण परण समभाव मन कोई न राखै;
काण दाखै जस सारी दुनी,रँग रे राजस्थान !!4!!

""छँद-रैँणकी""

मानैय इक रीत परण मरण मन उवा धरण है देख इया  मरिया पग रोप राङ बिच माणस,जीवट उर मेँ राख जिया शौभा इण भाँत साँभळी सुरपत ऐरावत चढ जात अयो सुरधर अन्नै अन्नै मरुधर सत जग पर समवङ रुप जयौ!!1!!

पैखो इम वीर धीर प्रण पाळण,सत पख चाढण नीर सदा ऊनी हद खीर दहै कर उणमेँ जुङै भीर न
होय जुदा भाँजण सौ भीङ अबळ पख भिङिया पीङ
निजू नह सोच पयौ सुरधर अन्नै अन्नैव मरुधर सत जग पर समवङ रुप जयौ!!2!!

शरणागत सटै शीश दे सूरा फिर पाछा नही वचन फुरै
धर पर अमर नाम रा धाका घण डाका जस जाप घुरै 
लाखाँ मुख निडर कीरति लाटण दाटण अरियण प्राण
दयौ सुरधर अन्नै अन्नै मरुधर सत जग पर समवङ रुप जयौ!!3!!

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