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वीरवर पाबूजी राठौड़ ॥


"रजवट रो थूं सेहरौ, सब सूरां सिरमौङ ।
धरती पर धाका पङै, रंग पाबू राठौड़ ।।
"घोङो, जोङो, पागङी, मूछां तणी मरोड़ ।
ऐ पांचू ही राखली, रजपूती राठौड़ ।।

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