Skip to main content

जोधपुर राज्य का रास्ट्रीय गीत :-

धुंसो बाजे रे महाराजा हणवंतसिंह रो, (वाह-वाह) धुंसो बाजे रे !!
महाराजा हणवंतसिंह कँवर कन्हैया, हुकम दियो रे खेलो होली !!

वाह-वाह धुंसो बाजे रे महाराजा, थारी मारवाड़ में धुंसो बाजे रे !!
जिवणी मिसल माहि चांपा कुंपा, ऐ ओगे मारू रण थाळ !

डावी रे मिसल उदा, मेड़तिया, जोधा है शुरा री ढाल !
आउवो आसोप तो माणक मूंगा , ज्यू सोहे रतना री माल !

रिंया रायपुर और खेरवो, दीपे ज्यू मारू करमाल !
जैमल हुओ मुलक चावो, अमरो हिन्दवा लज रखवाल !

मुकन जैदेव गोरा जसधारी, धिन दुर्गो रखियो अजमाल !
जठी रे जावे उठी फते कर आवे, बांकी है फोज राठौड़ी री राज !

बांका बांका पेच राठौडा ने सोहे, पिचरंगी पेच ढूंढाड़ भूपाल !
कड़ा ने किलंगी राठौडा ने फाबे, मोरिया पांख कछावा बाल !

लाख लाख वांरै तोप रैहकला, अणगिण ऊंट रसाला काल !

( जोधपुर गवर्नमेंट गजट से साभार, २७ जुलाई १९४७ ई.)

Comments

Popular posts from this blog

राजपूती दोहे

रा जा झुके, झुके मुग़ल मराठा, राजा झुके, झुके मुग़ल मराठा, झुक गगन सारा। सारे जहाँ के शीश झुके, पर झुका न कभी "सूरज" हमारा।। झिरमिर झिरमिर मेवा बरसे ! झिरमिर झिरमिर मेवा बरसे मोर...

राजपूती दोहे

•» ” दो दो मेला नित भरे, पूजे दो दो थोर॥ सर कटियो जिण थोर पर, धड जुझ्यो जिण थोर॥ ” मतलब :- •» एक राजपूत की समाधी पे दो दो जगह मेले लगते है, पहला जहाँ उसका सर कटा था और दूसरा जहाँ उसका ध...

वीरवर पाबूजी राठौड़ ॥

"रजवट रो थूं सेहरौ, सब सूरां सिरमौङ । धरती पर धाका पङै, रंग पाबू राठौड़ ।। "घोङो, जोङो, पागङी, मूछां तणी मरोड़ । ऐ पांचू ही राखली, रजपूती राठौड़ ।।