Skip to main content

मैं वह क्षत्राणी हूँ जो.....!

मै वह क्षत्राणी हूँ जो, महा काळ को नाच नचाने आई हूँ !
मै वह क्षत्राणी हूँ जो,तुम्हे तुम्हारे कर्तव्यबताने आई हूँ !
मै मदालसा का मात्रत्त्व लिए, माता की माहिमा,दिखलाने आई हूँ !
मै वह क्षत्राणी हूँ जो,तुम्हे फिर से स्वधर्म बतलाने आई हूँ !
हाँ
तुम जिस पीड़ा को भूल चुके, मै उसे फिर उकसाने आईहूँ !
मै वह क्षत्राणी हूँ ,जो तुम्हे फिर से क्षात्र-धर्म सिखलाने आई हूँ !

क्षत्राणी

Comments

Popular posts from this blog

राजपूती दोहे

रा जा झुके, झुके मुग़ल मराठा, राजा झुके, झुके मुग़ल मराठा, झुक गगन सारा। सारे जहाँ के शीश झुके, पर झुका न कभी "सूरज" हमारा।। झिरमिर झिरमिर मेवा बरसे ! झिरमिर झिरमिर मेवा बरसे मोर...

राजपूती दोहे

•» ” दो दो मेला नित भरे, पूजे दो दो थोर॥ सर कटियो जिण थोर पर, धड जुझ्यो जिण थोर॥ ” मतलब :- •» एक राजपूत की समाधी पे दो दो जगह मेले लगते है, पहला जहाँ उसका सर कटा था और दूसरा जहाँ उसका ध...

वीर योद्धा वीरमदेव के दोहे

मामा लाजै भाटिया कुल लाजै चहुॅआन । मूॅ परणूला तुरकडी तो अवलो ऊगे भाण ।। सोनगरो वंको क्षत्रिय अणरो जोश अपार । झेले कुण अण जगत मे वीरम री तलवार ।। बावीसी फौज करी विध विध गढ जाल...