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राजपूतों की ''ज्वाला''

राजपूतों की ''ज्वाला'' कभी ठंडी नहीं होती,
अदम्य शूरवीरों की यही तो पहचान है होती,,
यदि यह ''ज्वाला'' राजपूतों में न होती,
तो भारत के इतिहास में ना होते अनमोल मोती,

राजपूतों की आन-बाण-शान, है ये ''ज्वाला'',

प्रताप और पृथ्वी जैसे वीरों की पहचान है ये ''ज्वाला''.

इतिहास के कुछ पन्नो पे हमको मलाल है,

जिनमें कुछ कायरों की मिसाल है,,

जिन्होंने राजपूती कौम का सर शर्म से झुकवाया,

''ज्वाला'' को आन पे रख दुश्मनों से हाथ मिलाया,,

अगर पृथ्वीराज में ये ''ज्वाला'' का शोला ना भड़कता,

तो बिना देखे उसका तीर सुलतान को ना लगता,

ये तो इसी राजपूती ''ज्वाला'' का कमाल था,

''चार बांस-चौबीस गज-आठ अंगुल''

दुरी से गौरी का किया काम  तमाम था,,

हे राजपूत वीरों, ना ठंडी पड़ने देना कभी ये ''ज्वाला'',

क्योंकि असली राजपूतों की पहचान है ये ''ज्वाला'',

,राजपूतों की आन-बाण-शान, है ये ''ज्वाला'',

प्रताप और पृथ्वी जैसे वीरों की पहचान है ये ''ज्वाला'',

जय महाराणा,,बुलंद करो राजपुताना,

--मधु - अमित सिंह ..

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