आग धधकती है सीने मे, आँखों से अंगारे, हम भी वंशज है राणा के, कैसे रण हारे...? कैसे कर विश्राम रुके हम...? जब इतने कंटक हो, राजपूत विश्राम करे क्योँ, जब देश पर संकट हो. अपनी खड्ग उठा लेते ...
क्षत्रिय धर्म को भूल,राजपूत हम बन गये ! छोङे सारे क्षत्रिय सँस्कार, अँहकार मे तन गये ! क्षत्रिय धर्म मे पले हुए हम शिर कटने पर भी लङते थे ! दिख जाता अगर पापी ओर अन्याय कहिँ शेरो क...
माँ तुम्हारा लाडला रण में अभी घायल हुआ है... पर देख उसकी वीरता को, शत्रु भी कायल हुआ है... लग रहा है सिंहनी के कोख से पैदा हुआ हूँ... रक्त की होली रचा कर, मैं प्रलयंकारी दिख रहा हूँ ... म...
भूल क्षत्रिय धर्म को ,मात्र राजपूत हम बन गये, छोङे दिये सारे क्षत्रिय सँस्कार,और अँहकार मे तन गये । क्षत्रिय धर्म मे पलने वाले, शिर कटने पर भी लङते थे, होता अगर अन्याय और पाप क...
क्षत्रिय ! ! मित्रों ! क्षत्रिय पथ बिना रजपूती ना बणे रे भाईयों , लाख करो विचार । पथ छोङिया मँजिल ना मिले रे भाईयों , जतन करो हजार । मर्यादा रखी राजा राम ने रे भाईयों ,दुनिया पुजे ब...